पर्यावरण प्रबन्धन डिविजन - नियमावली

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धारा 4 की उपधारा 1 के खण्ड (ख) में उल्लिखित 17 मदें (मेनुअल), जो अधिनियम के कानून बनने के 120 दिन के भीतर प्रत्येक सार्वजनिक संस्था को प्रकाशित करना जरूरी है।

  1. पर्यावरण प्रबन्धन डिवीजन, (इएमडी) सेल का विवरण।
  2. अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य।
  3. सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई।
  4. सेल द्वारा कार्यों के लिए कारखाने द्वारा नियत मानक।
  5. सेल द्वारा अपने नियंत्रण में तथा उसके पास रखे गए नियम, विनियम, निर्देश, मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी अपने कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं।
  6. सेल के नियंत्रण में दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य। 
  7. जनता से विचार-विमर्श से नीति निर्धारण व उनके कार्यान्वयन के संबंध में व्यवस्था का विवरण।
  8. दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषदें, समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं।
  9. सेल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की डायरेक्टरी।
  10. प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, कम्पनी के नियमों के अन्तर्गत मुआवजे की प्रणाली।
  11. प्रत्येक एजेन्सी को आबंटित बजट, जिसमें सभी योजनाओं का विवरण, प्रस्तावित व्यय तथा किए गए भुगतान का विवरण हो।
  12. सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रमों से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण।
  13. सेल द्वारा दिए गए/दी गई रियायतें, परमिट, अधिकार का विवरण।
  14. इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में इसके पास उपलब्ध सूचना का विवरण।
    इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में उपलब्ध सूचना के लिए कृपया वेबसाइट www.sail.co.in देखें। 
  15. सूचना प्राप्त करने हेतु जनता के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जिसमें लाइब्रेरी या अध्ययन कक्ष के कार्य घण्टे बताए गए हों (यदि व्यवस्था है तो)।
    कम्पनी के निगमित कार्यालय में इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। परन्तु, निगमित कार्य प्रमुख की पूर्व अनुमति से इस्पात भवन के निचले तल पर स्थित लाइब्रेरी के प्रयोग की इजाजत दी जा सकती है।
  16. जन सूचना अधिकारियों के नाम, पद व उनके बारे में अन्य विवरण।
  17. निर्धारित अन्य कोई सूचना तथा प्रति वर्ष इनका नवीनीकरण।

पर्यावरण प्रबन्धन डिवीजन, (इएमडी) सेल का विवरण

पर्यावरण प्रबन्धन डिवीजन सेल की एक यूनिट है। यह 6 गणेश चन्द्र एवेन्यू, 5वीं मंजिल, कोलकाता-700013 स्थित है। 

उद्देश्य व कार्य

पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग

1989 में स्थापित, पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग (ईएमडी), आईएसओ 9001 के मानक वाली एक निगमित इकाई है l यह इकाई पर्यावरण संरक्षण और संसाधन की बेहतरी के लिए निम्नलिखित विविध गतिविधियों को शामिल करते हुए संयंत्रों, खदानों और इकाईयों के प्रयासों के एकत्रीकरण के लिए केंद्रीय भूमिका निभाती है:

सेल इकाईयों और नियामक अभिकर्ताओं के बीच एक सक्रिय अंतरापृष्ठ,

निगरानी और मूल्यांकन,

प्रौद्योगिकी प्रसार,

जागरूकता अभियान और कौशल उन्नयनl

इनके अतिरिक्त, संयंत्रों, खदानों और इकाईयों के निरंतर सहयोग से ईएमडी विभिन्न कार्यशालाओं और इकाईयों सहीत सेल के मालगोदामों में आईएसओ 14001 से जुड़े पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के प्रचार के लिए प्रयत्नशील रहा है l

 

ईएमडी की मुख्य गतिविधियाँ

 

 

 

पर्यावरण प्रबंधन

पर्यावरण में प्रदूषकों के उत्सर्जन एवं बहाव के स्तर को निर्धारित मानकों के अंतर्गत रखते हुए और प्रोसेस एवं टाउनशिप से उत्पन्न होने वाले कचरे का व्यवस्थापन पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन सम्बंधित नियमों के तहत करते हुए, सेल संयंत्र और खदान पारिस्थितिकीय संतुलन को बिगाड़े बिना अपने प्रक्रियाओं का संचालन करते है l सेल ने निगमित पर्यावरण नीति (कॉर्पोरेट एनवायरनमेंट पालिसी) के अनुरूप अपने पर्यावरण सम्बन्धी दृष्टिकोण को भी विकसित किया है जो ना केवल अनुपालन की आवश्यकता को सम्बोधित करता है बल्कि इससे आगे जाने के प्रयासों पर भी जोर डालता है l इसके अतिरिक्त, सेल अपने सभी हितधारकों की चिंताओं का समाधान करने और उनमें पर्यावरण सम्बंधित अपने दृष्टीकोण का प्रसार करने के लिए प्रतिबद्ध है l

शुरुआत से ही, सेल के संयंत्र और खदान अनवरत रूप से इस दिशा में कठोर प्रयास कर रहे हैं ताकि विभिन्न संचालनों का निष्पादन पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से हो सके l इसके परिणामस्वरुप, उत्सर्जनों और बहावों के स्तर में कमी आई है, ठोस अपशिष्टों के पुनः उपयोग एवं हरित विकास में भी वृद्धि हुई है l सेल के संयंत्र और खदान प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों/सुविधाओं का कुशलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं और पुनर्निर्माण एवं नवीनीकरण के माध्यम से नियमित रूप से इनका अनुरक्षण किया जा रहा है और आवश्यकता अनुसार उनमें सुधार भी लाया जा रहा है, ताकि दिन प्रतिदिन कठोर हो रहे पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन हो सकेl

सम्मिलित प्रयासों से, पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) एमिशन लोड में उत्तरोत्तर कमी आ रही है l इसके अतिरिक्त, विस्तार एवं आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के दौरान, नवीनतम प्रदूषण नियंत्रण सुविधाओं के साथ-साथ, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकीयों को कार्यान्वित किया जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप, प्रदूषण स्तर और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी कमी आई है l

इसी प्रकार से, इस्पात संयंत्रों और खदानों में विभिन्न कार्यशालाओं में स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांटों (ईटीपी) का प्रभावशाली संचालन करके, स्थानीय जल पुनःसंचरण प्रणालियों का कायाकल्प करके और संशोधित अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण के माध्यम से, जल प्रदूषण के स्तर को कठोरतापूर्वक नियंत्रित किया जाता है l संयंत्रों एवं खदानों के विभिन्न संचालनों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का संशोधन ईटीपी’यों में किया जाता है और सीमा में स्थित मुहानों के माध्यम से प्रवाह किया जाता है, जो सम्बंधित निर्धारित मानदंडों के अनुकूल होता हैl

पिछले पाँच वर्षों के दौरान, सेल के पर्यावरणीय प्रदर्शन में आये सुधार को नीचे दर्शाया गया है:

स्पेसिफिक एफ्लुएंट लोड लगभग 26% तक घट गया है

स्पेसिफिक एफ्लुएंट डिस्चार्ज लगभग 18% तक घट गया है

स्पेसिफिक पार्टिकुलेट मैटर एमिशन लगभग 14% तक घट गया है

स्पेसिफिक कार्बन डाइऑक्साइड एमिशन लगभग 5% तक घट गया है

स्पेसिफिक वाटर कंसम्पशन 1% से अधिक घट गया है

ब्लास्ट फर्नेस स्लैग का उपयोग 3% से अधिक बढ़ गया है l

 

स्वच्छ प्रौद्योगिकीयों और अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण/सुविधाओं का अभिग्रहण:

अपने वृहद् विस्तार एवं आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के दौरान, अपनाई गयी कुछ मुख्य स्वच्छ प्रौद्योगिकीयों और प्रदूषण नियंत्रण सुविधाओं के क्रियान्वन की दिशा में उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

बीएसपी, आरएसपी एवं आईएसपी में उच्चतर क्षमता वाले (ऊँचे) कोक ओवन बैटरियों की स्थापना जिसमें लैंड बेस्ड पुशिंग एमिशन कंट्रोल सिस्टम, कोक ड्राई कूलिंग प्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्धl

आरएसपी एवं आईएसपी में सिंटर संयत्रों में उन्नत इग्निशन प्रणाली (मल्टी-स्लिट बर्नर्स), सिंटर कूलर वेस्ट हीट रिकवरी सिस्टम जैसी सुविधाओं का प्रावधान l

बीएसपी, आरएसपी एवं आईएसपी में उच्चतर क्षमता वाले ब्लास्ट फर्नेसों की स्थापना जिसमें टॉप गैस प्रेशर रिकवरी टरबाइन, वेस्ट हीट रिकवरी, कोल् डस्ट इंजेक्शन, कास्ट हाउस डी-डस्टिंग, कास्ट हाउस स्लैग ग्रनुलेशन और टारपीडो लैडल जैसी प्रणालियाँ उपलब्धl

सम्पूर्ण सेल संयंत्रों में ऊर्जा की प्रखर खपत वाले इंगोट रूट को चरणबद्ध तरीके से हटानाl

सभी संयंत्रों में ऊर्जा खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने हेतु रोलिंग मिल्स में पुशर टाइप रीहीटिंग फर्नेसों के स्थान पर वाल्किंग बीम रीहीटिंग फर्नेसों की स्थापनाl

नई पहल

आरएसपी में सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग:

आरएसपी ने हाल ही में सड़क निर्माण के लिए हॉट मिक्स संयंत्र के जरिए प्लास्टिक कचरे के उपयोग के लिए एक हरित पहल की है l एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में, एक किलोमीटर सड़क का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है l आरएसपी की अन्य सड़कों एवं बाकी संयंत्रों में, सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग करने हेतु योजना बनाई जा रही हैl

 

आरएसपी में कार्बन डाइऑक्साइड के बायो-सेक्वेस्ट्रेशन के लिए परियोजना:

कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने और उत्पादित कार्बन को प्रणाली में फिर से लौटा देने के उद्देश्य हेतु, सेल अपने कार्बन फुटप्रिंट का मूल्यांकन कर रहा है और साथ ही साथ अपने वर्तमान जैविक संसाधनों के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड के अधिग्रहण के सामर्थ्य का भी मूल्यांकन कर रहा है l वनीकरण के माध्यम से कार्बन अधिग्रहण पर राउरकेला इस्पात संयंत्र में एक परियोजना का आरंभ किया गया है l इस परियोजना को पूर्ण रूप देने के लिए मैसर्स. ट्रॉपिकल फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट, जबलपुर को फ़रवरी 2014 में नियुक्त किया गया हैl यह परियोजना मार्च 2019 तक जारी रहेगी l

 

जल संरक्षण – बेहतर कल की ओर एक अनवरत अभियान

कई वर्षों से, सेल संयंत्र और खदान अपने संचालन के लिए जल की खपत में कमी लाने के लिए विभिन्न कदम उठा रहे हैं l फिर भी, इस अमूल्य संसाधन के अधिक संरक्षण हेतु, सेल के संयंत्रों एवं नगरों और आसपास के समाज में जल के संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है l इस अभिनव प्रयास को प्रोत्साहन देने के लिए जनवरी 2017 को “जल संरक्षण माह’’ के रूप में मनाया गया और इसके उपरांत इस दिशा में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैl

सभी संयंत्रों, खदानों और इकाइयों में कर्मचारियों, उनके परिवार के सदस्यों और सभी हितधारकों के बीच जल संरक्षण की आवश्यकता के सम्बन्ध में जागरूकता का निर्माण करने के लिए एक माह तक जागरूकता कार्यक्रमों को निष्पादित किया गया l

साथ ही साथ, पिछले वर्ष के दौरान जल की खपत में प्रशंसनीय कमी लाने और जल संरक्षण पर एक दिव्य दृष्टिकोण विकसित करने के लिए, संयंत्रों एवं खदानों में छोटी एवं लम्बी अवधि के कार्यान्वयन योग्य कार्ययोजनाओं को सूत्रित किया गया l छोटी अवधि के कार्ययोजनाओं को पहले ही कार्यान्वित किया जा चुका है जिसके फलस्वरूप, जल की खपत कम हो गई है l लम्बी अवधि की कार्ययोजनाएँ क्रियान्वन के विभिन्न चरणों में हैं l जल संरक्षण में अपेक्षित सुधार की शुरुआत हो गयी है l

 

इसके अतिरिक्त, सभी संयंत्रों एवं खदानों के लिए “जीरो लिक्विड डिस्चार्ज” (जेडएलडी) अपनाना एक अधिदेश बन गया है l इस उद्देश्य से, सेल के सभी संयंत्रों एवं इकाइयों में पहले से ही आवश्यक कदम उठाए गए है l

 

पॉली क्लोरीनेटेड बाय फिनाइल्स (पीसीबी) का पर्यावरण अनुकूल निस्तारण के लिए बीएसपी में सुविधा

 

पॉली क्लोरीनेटेड बाय फिनाइल्स (पीसीबी), जो कि अत्यधिक विषाक्त एवं पर्यावरणीय प्रदूषक होते है, कृत्रिम जैविक रसायन की श्रेणी में आते हैं और इनका उपयोग कई उद्योगों में किया जाता है l स्टॉकहोम सम्मलेन नामक एक अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध के अंतर्गत इन रसायनों को परसिस्टेंट आर्गेनिक पोलुटेंट्स (पीओपी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है l इस संधि के तहत पीओपी के उत्पादन और उपयोग को खत्म या प्रतिबंधित करना है। पॉली क्लोरीनेटेड बाय फिनाइल्स के नियमन हेतु भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अप्रैल, 2016 में एक अधिसूचना जारी की हैl अधिसूचना के अनुसार, किसी भी स्वरुप में पीसीबी का उपयोग 31 दिसम्बर, 2025 तक पूरी तरह से निषिद्ध किया जायेगा l

देश में संचित पीसीबी के प्रबंधन एवं निस्तारण करने हेतु अत्याधुनिक सुविधा को विकसित करने के लिए और इस विषय में देश की आवश्यकता को समझते हुए, बीसीपी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भारत सरकार) और यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (यूनिडो) की साझेदारी में संयंत्र स्थल पर पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण सुविधा को स्थापित करने के लिए एक परियोजना की पहल की है l परियोजना को यूनिडो के माध्यम से ग्लोबल इनवायरनमेंट फैसिलिटी (जीईएफ) द्वारा आंशिक रूप से अनुदान दिया गया है l सेल, आधारिक संरचनाएँ जैसे कि भूमि का प्रावधान, निर्माण, नागरिक कार्य, जनोपयोगी सुविधाओं और श्रमिक आदि के द्वारा परियोजना को सह-वित्त प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है l 2018-19 के दौरान, इस परियोजना का कार्य संपन्न हो जाने की सम्भावना है l

 

आईएसओ-14001 के साथ जुड़े पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) का क्रियान्वन

पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली का क्रियान्वन पहले ही लगभग सभी संयंत्रों एवं खदानों में कर दिया गया है एवं वर्तमान में वही व्यवहार में है l उसके अतिरिक्त, निम्नलिखित सेल इकाईयों को हाल के वर्षों में ईएमएस के साथ प्रमाणित किया गया है:

चंद्रपुर फेरो एलॉय संयंत्र, चंद्रपुर

बारसुआ लौह अयस्क खदान, बारसुआ

मिश्रधातु इस्पात संयंत्र, दुर्गापुर

अहमदाबाद, गाज़ियाबाद, फरीदाबाद, विशाखापटनम, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, दुर्गापुर, डानकुनी, बोकारो और बैंगलोर में स्थित सीएमओ के मालगोदाम

र्ष 2017-18 के दौरान, कानपुर में स्थित मालगोदाम को भी ईएमएस से अधिकृत कर दिया गया है l यह प्रणाली वर्तमान में ईस्को इस्पात संयंत्र में क्रियान्वन के अंतर्गत है l

 

हरियाली में वृद्धि:

पेड़-पौधे कार्बन सिंक के रूप में पारिस्थितिकी प्रणालियों और कार्यों को संतुलित करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं l पेड़ों के विराट योगदान को मन में रखते हुए, सेल अपने स्थापना से ही संयंत्रों और खदानों में व्यापक वनीकरण कार्यक्रम अपनाता आ रहा है l

आरंभ से ही, कुल मिलाकर 201.54 लाख पौधों को रोपा गया है l वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान, एक विशेष अभियान के माध्यम से लगभग 8.28 लाख पौधों को सेल संयंत्रों, खदानों और गोदामों में रोपा गया है l

 

सतत विकास परियोजनाएँ:

जैव-विविधता को बनाये रखने एवं उसमें वृद्धि लाने और पारिस्थितिकी प्रणालियों की सेवाओं को फिर से बहाल करने के लिए निम्नीकृत पारिस्थितिकी प्रणालियों को पुनः स्थापित करना और उन्हें फिर से बहाल करना आवश्यक है l दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से सेल द्वारा पूर्णपानी चूनापत्थर खदानों के और बोलानी अयस्क खदानों के खोदे गए क्षेत्रों और खाली खदानों के जलस्रोतों को पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापना के लिए लिया गया है l

 

4R’ (रिडक्शन, रीयूज, रीसायकल एवं रिकवरी) नीति के उपयोग से बीएफ और बीओएफ स्लैग जैसे अपशिष्टों के पुनःउपयोग में वृद्धि करने के प्रयास

संयंत्र की सीमा के अन्दर उत्पन्न किये गए अपशिष्टों के उपयोग में वृद्धि करने के दृष्टिकोण से, निम्नलिखित आर&डी आधारित क़दमों को हाल ही में उठाया गया है:

भाप के उपयोग से बीओएफ स्लैग का मैचुरिंग

बीओएफ स्लैग का ड्राई ग्रैनुलेशन

बीओएफ स्लैग का रेल पथ की गिट्टी के रूप में उपयोग

बीएफ एवं बीओएफ स्लैग का प्राकृतिक समूहों के विकल्प के रूप में उपयोग

बीएफ/बीओएफ स्लैग का सड़क निर्माण में उपयोग

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अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य

अधिकारों का प्रत्यायोजन 

निगमित मार्गदर्शी सिद्धान्तों के अनुसार (संलग्न)

कार्यपालक निदेशक इंचार्ज इस यूनिट का मुख्य कार्यकारी है। पर्यावरण प्रबन्धन डिवीजन के अधिकारी व कर्मचारी कार्यपालक निदेशक (इएमडी) के अधीन कार्य करते हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाते अपने कर्तव्यों के निर्वाहन के लिए कार्यपालक निदेशक इंचार्ज (इएमडी) को अधिकार प्रत्यायोजित किए गए हैं। डिवीजन का कार्य सहज रू से चलाने के उद्देश्य से कार्यपालक निदेशक (इएमडी) ने, ऐसे अधिकारियों जो सीधे उन्हें रिपोर्ट करते हैं, अधिकार सौंपे हैं।

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सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई

निर्णय कम्पनी के नियमों, नीतियों, प्रत्यायोजित अधिकारों के अनुसार किए जाते हैं।

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सेल द्वारा कार्यों के लिए कारखाने द्वारा नियत मानक

निदेशक (तकनीकी), सेल द्वारा कार्यपालक (इएमडी) को प्रत्यायोजित अधिकार तथा कम्पनी की नीतियों, नियमों तथा प्रक्रियाओं के अनुसार मानक नियत किए जाते हैं। 

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सेल द्वारा अपने नियंत्रण में तथा उसके पास रखे गए नियम, विनियम, निर्देश, मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी अपने कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं

इसके द्वारा अपने नियंत्रण में रखे गए दस्तावेजों की श्रेणी के संबंध में दस्तावेजसेल कार्मिक मेनुअल जिसमें कार्मिक नीतियां, नियम, कर्मचारी आचार, अनुशासन तथा अपील नियम हैं।

अधिकार प्रत्यायोजन
क्रय/ठेका प्रक्रिया-2000
कर्मचारी कार्य निष्पादन समीक्षा

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सेल के नियंत्रण में दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य

1 अपने कार्यपालकों के रहने हेतु लिए गए मकानों के संबंध में लीज़ समझौते।
2 अपने कर्मचारियों को दिए गए भवन निर्माण ऋण संबंधी दस्तावेज।
3 अपने कर्मचारियों को कार/दो पहिए के वाहनों की खरीद के लिए दिए गए ऋण संबंधी दस्तावेज।
4 कार्यालय उपस्करों के लिए विभिन्न पक्षों को दिए गए वार्षिक रखरखाव ठेकों से संबंधित दस्तावेज।
5 कार्यालय के कामकाज के लिए की गई खरीद से संबंधित दस्तावेज।
6 विभिन्न वाणिज्यिक व तकनीकी गतिविधियों से संबंधित दस्तावेज।
7 कर्मचारियों के संबंध में व्यक्तिगत विवरण।

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जनता से विचार-विमर्श से नीति निर्धारण व उनके कार्यान्वयन के संबंध में व्यवस्था का विवरण

ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

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दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषदें, समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं

यह सेल की केवल एक यूनिट है अतः इसका अलग से कोई मण्डल/परिषद्/समिति नहीं है।

जहां तक पर्यावरण प्रबन्धन डिवीजन (इएमडी) का प्रश्न है सामान्य तौर पर वहां ऐसी कोई समितियां नहीं हैं। परन्तु, पर्यावरण नियंत्रण विभाग (इसीडी) प्रमुखों की बैठक, पर्यावरण सुरक्षा के लिए निगमित दायित्व बैठक (सीआरइपी) पर्यावरण निष्पादन समीक्षा बैठक आदि जैसी बैठकें नियमित तौर पर आयोजित की जाती हैं। ये बैठकें बारी-बारी से कारखानांे में होती हैं। बैठकों में विचारार्थ मुख्य विषय तकनीकी हैं जो विभिन्न सुधारों, तकनीकी पक्षों पर कार्य उजागर करते हैं। बैठकों की रिकार्ड टिप्पणियां उपलब्ध हैं।

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पर्यावरण प्रबन्धन डिवीजन, सेल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की डायरेक्टरी

पर्यावरण प्रबन्धन डिवीजन, सेल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की डायरेक्टरी

पदनाम (पदों की संख्या) अधिकारी का नाम श्री/श्रीमती टेलीफोन
कार्यपालक निदेशक(1) डाॅ. राज कुमार अग्रवाल 033-22250885
महाप्रबंधक(1) सुशील कुमार जैन 033-22361504
उप महाप्रबंधक(3) सन्तोष चटर्जी
डाॅ. (सुश्री) मीनाक्षी कक्कड 
अशोक कुमार दास
033-22255053
011-22465009
033-22361850
सहायक महाप्रबंधक 4) कृष्ण मोहन खरे
देब प्रिय सेन
तापस कुमार भौमिक
कल्याण कुमार चक्रबर्ती
033-22255036
033-22348531
033-22250879
033-22250879
वरिष्ठ प्रबंधक(3) सुनील सिंघल
डाॅ. (श्रीमती) श्वेता सुकुल
अजन्ता सेनगुप्ता
011-22465009
033-22252216
033-22374330
प्रबन्धक (5) मीनाक्षी सान्याल
त्रिदिब मण्डल
अरघ्यजीत साहा
सुमिता शर्मा
राखी सेन
033-22252216
033-22374330
033-22374330
033-22263399
011-22465009
उप प्रबन्धक(1) अतीन्द्र मोहन गुहा 033-22250885
सहायक प्रबन्धक(1) बसाबी सेन 033-22374330
कनिष्ठ प्रबन्धक (1) आनन्द मोहन सेन 033-22374330

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प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, कम्पनी के नियमों के अन्तर्गत मुआवजे की प्रणाली

इसके अधिकारियों को मासिक वेतन इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अनुमोदित वेतनमानों के अनुरूप दिया जाता है।

कर्मचारियों को मासिक वेतन सेल प्रबन्धन तथा मजदूर संघों के बीच हुए एनजेसीएस समझौते के अनुसार दिया जाता है।

अधिकारियों तथा कर्मचारियों के मासिक वेतन उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में जमा कराए जाते हैं। 

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प्रत्येक एजेन्सी को आबंटित बजट, जिसमें सभी योजनाओं का विवरण, प्रस्तावित व्यय तथा किए गए भुगतान का विवरण हो

गैर-योजना पूंजीगत बजट की तुलना में परिचालन व्यय की रिपोर्ट हर माह निगमित कार्यालय को भेजी जाती है।

1.परिचालन बजट 2006-07 2007-08 2008-09
बजट के अनुरूप (शुद्ध कमी) लाख रु. में Rs 407.50 Rs 455.14 Rs 559.90
2.गैर योजना बजट व्यय लाख रु.में 11.50 5.00 5.00

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सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रमों से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण

कैन्टीन सहायता:-

ईएमडी, सेल के प्रत्येक कर्मचारी तथा अधिकारी को वेतन के साथ प्रति माह 620/- रु. कैन्टीन सहायता के रूप में दिए जाते हैं।

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सेल द्वारा दिए गए/दी गई रियायतें, परमिट, अधिकार का विवरण

इएमडी, सेल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

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इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में इसके पास उपलब्ध सूचना का विवरण

जी हाँ, आरम्भिक पर्यावरण समीक्षा (आईइआर), पर्यावरण कार्य निष्पादन रिपोर्ट (इपीआर), वार्षिक कार्य निष्पादन प्रतिवेदन (एपीआर), वार्षिक प्रतिवेदन आदि इलेक्ट्राॅनिक स्वरूप में उपलब्ध कराए गए हैं।

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सूचना प्राप्त करने हेतु जनता के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जिसमें लाइब्रेरी या अध्ययन कक्ष के कार्य घण्टे बताए गए हों (यदि व्यवस्था है तो)

सूचना कार्मिक विभग से किसी भी कार्य दिवस को 3 से 5 बजे दोपहर प्राप्त की जा सकती है।

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जन सूचना अधिकारियों के नाम, पद व उनके बारे में अन्य विवरण

जन सूचना अधिकारी:

श्री श्रीमती सुमिता सरमा
प्रबन्धक (कार्मिक), इएमडी
6 गणेश चन्द्र एवेन्यू,
5वीं मंजिल
कोलकाता-700013
टेलीफोन: (033) 22375291/22263399
आवास: (033) 23590654 

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निर्धारित अन्य कोई सूचना तथा प्रति वर्ष इनका नवीनीकरण

कोई नहीं।

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