दुर्गापुर इस्पात संयंत्र - नियमावली

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धारा 4 की उपधारा 1 के खण्ड (ख) में उल्लिखित 17 मदें (मेनुअल), जो अधिनियम के कानून बनने के 120 दिन के भीतर प्रत्येक सार्वजनिक संस्था को प्रकाशित करना जरूरी है।

  1. दुर्गापुर इस्पात कारखाने के संगठन, कार्य और कर्तव्यों का विवरण।
  2. अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य।
  3. सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई।
  4. कार्यों के लिए दुर्गापुर इस्पात कारखाने द्वारा नियत मानक।
  5. सेल द्वारा अपने नियंत्रण में रखे गए नियम, विनियम, निर्देश, मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी अपने कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं।
  6. दुर्गापुर इस्पात कारखाने के नियंत्रण मे दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य।
  7. जनता से विचार-विमर्श से नीति निर्धारण व उनके कार्यान्वयन के संबंध में व्यवस्था का विवरण।
  8. दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषदें, समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं ?
  9. दुर्गापुर इस्पात कारखाने के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की डायरेक्टरी।
  10. प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, कम्पनी के नियमों के अन्तर्गत मुआवजे की प्रणाली।
  11. प्रत्येक एजेन्सी को आबंटित बजट, जिसमें सभी योजनाओं का विवरण, प्रस्तावित व्यय तथा किए गए भुगतान का विवरण हो।
  12. सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रमों से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण।
  13. दुर्गापुर इस्पात कारखाने द्वारा दिए गए/दी गई रियायतें, परमिट, अधिकार का विवरण।
  14. इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में इसके पास उपलब्ध सूचना का विवरण। इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में उपलब्ध सूचना के लिए कृपया वेबसाइट www.sail.co.in देखें।
  15. सूचना प्राप्त करने हेतु जनता के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जिसमें लाइब्रेरी या अध्ययन कक्ष के कार्य घण्टे बताए गए हों (यदि व्यवस्था है तो)।
    कम्पनी के निगमित कार्यालय में इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। परन्तु, निगमित कार्य प्रमुख की पूर्व अनुमति से इस्पात भवन के निचले तल पर स्थित लाइब्रेरी के प्रयोग की इजाजत दी जा सकती है।
  16. जन सूचना अधिकारियों के नाम, पद व उनके बारे में अन्य विवरण।
  17. निर्धारित अन्य कोई सूचना तथा प्रति वर्ष इनका नवीनीकरण।

दुर्गापुर इस्पात कारखाने के संगठन, कार्य तथा कर्तव्यों का विवरण

दुर्गापुर इस्पात कारखाना 1950 के अन्तिम वर्षों में ब्रिटिश सहयोग से स्थापित किया गया। इसकी आरम्भिक उत्पादन क्षमता 10 लाख टन कच्चा इस्पात प्रति वर्ष थी। 1960 के अन्तिम वर्षों में इसकी क्षमता बढ़ाकर 16 लाख टन कर दी गयी। 1990 के आरम्भिक वर्षों में कारखाने का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण किया गया। जहाँ एक ओर टेक्नोलाॅजी का नवीकरण किया गया, वहीं दूसरी ओर उस टेक्नोलाॅजी पर कार्य करने के लिए इसके मानव संसाधनों को भी व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। तत्पश्चात् दुर्गापुर इस्पात कारखाने ने आईएसओ 9000:2001 गुणवत्ता विश्वसनीयता प्रणाली प्राप्त की और कारखाना देश के सबसे आधुनिक कारखानों में से एक हो गया है। प्रबन्धन में भागीदारी से उत्साहित दुर्गापुर इस्पातकर्मी दल ने पिछले वर्षों में सामने आए उच्च प्रतियोगी बाजार में आगे बढ़ने के अपने स्पष्ट संकल्प को दर्शाया है। 

इस्पात कारखाना:

पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में से एक यह कारखाना 6.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसमें लगभग 16 हजार लोग कार्य करते हैं। कारखाने की निर्धारित तप्त धातु उत्पादन क्षमता 21 लाख टन तथा कच्चा इस्पात उत्पादन क्षमता 19 लाख टन है। यहाँ 16 लाख टन विक्रेय इस्पात का उत्पादन होता है।

प्रमुख सुविधाएँ:

कच्चा माल उठाने-रखने का संयंत्र

कारखाने में कच्चा माल उठाने-रखने, भण्डारण तथा कच्चे माल की गुणवत्ता में एकरूपता बनाए रखने की अधुनातन सुविधाएँ हैं। आधुनिकीकरण के दौरान लगाए गए इस संयंत्र की वार्षिक क्षमता 34.4 लाख टन मिश्रण तैयार करने की है।

कोक भट्टी एवं कोयला रसायन

कोक भट्टी तथा कोयला रसायन के 4 मुख्य विभाग - कोक की तैयारी, कोयले का कार्बनाइजेशन, कोक उठाना-रखना व कोयला रसायन - हैं। दुर्गापुर इस्पात कारखाने के कोयला तैयारी संयंत्र की विशेषता विभिन्न श्रेणियों के कोयले की अपेक्षित क्रशिंग के लिए चुनी गई श्रेणियांे की पिसाई है। कारखाना अपनी कोक आवश्यकताएं पूरी करने के लिए 4 भट्टियां चला रहा है।

सिन्टर संयंत्र

यह माना गया था कि 21 लाख टन तप्त धातु के उत्पादन के लिए धमन भट्टियों में 75 प्रतिशत सिन्टर, अर्थात् कुल 30 लाख टन सिन्टर का उपयोग करना होगा। आधुनिकीकरण योजना के अन्तर्गत 198 वर्ग मीटर क्षेत्र में ईंधन की कम खपत वाली आधुनिक सिन्टरिंग मशीनें लगाई गई हैं। इसकी सिन्टर उत्पादन क्षमता 17 लाख टन है। आवश्यकता का शेष अंश नवीकृत पुराने सिन्टर संयंत्र से पूरा होता है।

धमन भट्टियाँ

कारखाने में 3 तीन आधुनिकीकृत धमन भट्टियाँ हैं। इनमें प्रति वर्ष 21 लाख टन तप्त धातु उत्पादन की क्षमता है। सहायक इकाइयों में जब भी आवश्यक हो, कच्चा लोहा बनाने के लिए 3 पिग कास्टिंग मशीनें हैं। 2 धमन भट्टियों में ग्रेनुलेटेड स्लैग बनाने की क्षमता है। गेनुलेटेड स्लैग सीमेन्ट निर्माताओं द्वारा सीमेन्ट बनाने के काम आता है। 

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अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य

कम्पनी के आर्टिकल्स आॅफ ऐसोसिएशन के अधीन प्रदत्त अधिकारों के अनुसार निदेशक मण्डल ने कम्पनी के प्रबन्धन के लिए कम्पनी के अध्यक्ष को अधिकार प्रदान किए हैं। अध्यक्ष ने यह अधिकार दुर्गापुर इस्पात कारखाने के प्रबन्ध निदेशक तथा प्रबन्धक निदेशक ने कार्यों के कुशल संचालन के लिए दुर्गापुर इस्पात कारखाने के कार्यकारी निदेशकों तथा महाप्रबंधकों को प्रदान कर दिए हैं। गोपनीय होने के कारण दुर्गापुर इस्पात कारखाने के प्रबन्ध निदेशक तथा कार्यपालकों के वित्तीय अधिकारों का विवरण नहीं दिया जा रहा है।

दुर्गापुर इस्पात कारखाने के अधिकारियों व कर्मियों को निम्नलिखित सामान्य कार्य करने होते हैं:

दुर्गापुर इस्पात कारखाने के लिए दीर्घकालीन रणनीति आयोजन।
कारखाना स्तर पर नीति निर्धारण, नीतियों के कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना निर्धारित करना तथा उन्हें लागू करना।
उद्देश्यों, लक्ष्यों तथा कार्य योजना के सम्बन्ध में संगठनात्मक निष्ठा जागृत करना व इन्हें स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना।
प्रत्येक क्षेत्र के लिए कार्य निष्पादन के मानक विकसित करना तथा निरन्तर बेहतर मानकों के लिए कर्मियों में निष्ठा भाव जगाना।
सहज एवं कुशल परिचालन तथा वर्तमान संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, कम्पनी के सुव्यवस्थित विकास व लक्ष्यों की प्राप्ति, कम्पनी की कार्य कुशलता अधिकतम करने के लिए संगठन का विकास।
लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक क्षेत्र के कार्य निष्पादन की समीक्षा तथा, जहाँ आवश्यक हो, जरूरी उपायों के बारे में सुझाव देना।
कम्पनी में निष्ठावान कर्मी दल तथा उच्च कौशल-प्राप्त प्रबन्धकीय कैडर तैयार करना।
कम्प्यूटरीकृत डाटा बैंक और समस्या-पहचान तथा समस्या-समाधान के लिए कम्पनी में एमआईएस विकसित करना।
स्थायी संचार माध्यमों से दुर्गापुर इस्पात कारखाने तथा सेल की निगमित छवि का प्रचार-प्रसार।

विभिन्न क्षेत्र के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य उनके विभागों के कार्य व उत्पादों पर निर्भर होते हैं।

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सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय प्रक्रिया के लिए कार्रवाई

दुर्गापुर इस्पात कारखाने में निर्णय लेने की प्रक्रिया वही है जो सेल की अन्य यूनिटों में अपनाई जाती है। आमतौर पर, ऐसे प्रस्ताव जिन पर निर्णय लिया जाना है उपयुक्त स्तर पर वित्तीय पक्षों व उनके महत्व तथा समय सीमा के आधार पर कार्यपालकों द्वारा शुरू किए जाते हैं। सामान्य तौर पर प्रस्ताव सहायक प्रबन्धक/उप प्रबन्धक/प्रबन्धक के स्तर पर शुरू होते हैं। इन्हें उप महाप्रबंधक/महाप्रबंधक/प्रबंध निदेशक द्वारा स्वीकृति प्रदान की जाती है। स्वीकृति कौन देगा यह अधिकारियों को प्रदत्त स्वीकृति अधिकार पर निर्भर होता है। जो प्रस्ताव प्रबंध निदेशक के अधिकारों से बाहर होते हैं उन्हें स्वीकृति के लिए अध्यक्ष/निदेशक मण्डल जैसा भी हो, की स्वीकृति के लिए प्रेषित किया जाता है।

सेल का एक मूल मन्त्र है। इसी मूल मन्त्र को स्वीकार करते हुए दुर्गापुर इस्पात कारखाना लोहे व इस्पात का एक विश्व श्रेणी का उत्पादक तथा भारतीय इस्पात कारोबार में अग्रणी बनने पर जोर देता रहा है। दुर्गापुर इस्पात कारखाने में नीति निर्धारण और निर्णय लेने के आधार गुणवत्ता, उत्पादकता, लाभप्रदता तथा उपभोक्ता संतुष्टि रहे हैं। ध्येय और उसके मार्गदर्शी सिद्धान्त व संगठन के उद्देश्य कारखाने की नीति व रणनीति निर्धारण की राह दिखाते हैं।

सेल का ध्येय है :-

एक सम्मानित विश्व स्तरीय प्रतिष्ठान बनने के साथ-साथ भारतीय इस्पात व्यवसाय में गुणवत्ता, उत्पादकता, लाभप्रदता और उपभोक्ता संतुष्टि के क्षेत्र में अग्रणी रहना। 

मार्गदर्शी सिद्धान्त, जिन पर मूल मन्त्र व ध्येय आधारित है -

- हम उपभोक्ताओं के साथ विश्वास एवं पारस्परिक हित पर आधारित चिरस्थायी संबंध बनाते हैं।
- हम अपने व्यवसाय के संचालन में सर्वोच्च नैतिक मानकों को कायम रखते हैं।
- हम एक ऐसी संस्कृति का सृजन और पोषण करते हैं जिसमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सके एवं ज्ञानार्जन और परिवर्तन के प्रति सहक्रियात्मक हो।
- हम कर्मचारियों को प्रगति एवं पुरस्कार के अवसरों से युक्त चुनौतीपूर्ण रोजगार पेश करते हैं।
- हम लोगों के जीवन में सार्थक परिवर्तन लाने के अवसर और दायित्व को मूल्यवान समझते हैं।

दुर्गापुर इस्पात कारखाने के उद्देश्य उत्कृष्टता के मार्ग पर अग्रसर होने के मूल मंत्र और ध्येय पर आधारित हैं।

दुर्गापुर इस्पात कारखाने के सभी विभागों में निर्णय लेने की प्रक्रिया लागत तथा गुणवत्ता लाभों के साथ विकास नीति से जुड़ी है। सभी रणनीतियाँ परिचालन कार्यकुशलता तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों का अधिकतम लाभ उठाने से सम्बन्धित हैं। इस्पात कारखाने के विभागाध्यक्ष इन उद्देश्यों व लक्ष्यों तथा लिए गए निर्णयों की जानकारी कर्मचारियों के हर वर्ग तक पहंुचाने के लिए हर सम्भव प्रयास करते हैं। कार्यपालकों को संगठन तथा विकास से सम्बद्ध ‘महत्वपूर्ण कार्य क्षेत्रों’ की जिम्मेदारी दी जाती है। इन क्षेत्रों का कार्य व लक्ष्यों में विभाजन किया जाता है। प्रत्येक कार्य व लक्ष्य की पूर्व निर्धारित समय-सीमा होती है तथा उसका उत्तरदायित्व नियत होता है। इससे निर्णय के कार्यान्वयन का उत्तरदायित्व स्पष्ट हो जाता है तथा ‘महत्वपूर्ण कार्य क्षेत्रों’ (केपीए) का संगठन अधिक्रम सुपरविजन के चैनलों का निर्णय करता है।

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अपने कार्यों के निर्वाह के लिए भिलाई इस्पात कारखाने द्वारा नियत मानक

कारखाने के सभी परिचालन क्षेत्र आईएसओ: 9001ः2000 गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं। आईएसओ मानक सम्पूर्ण उत्पादन क्षेत्र पर तथा सह-कार्य जैसे प्रशिक्षण और विकास, जो कारखाने को सेवा उपलब्ध कराते हैं, पर आधारित हैं।

तकनीकी-आर्थिक मानक की मात्रा प्रत्येक विभाग के समग्र उत्पादन क्षेत्र के लिए नियत की गई है और ये मानक विभिन्न गतिविधियों के लिए मार्गदर्शन करते हैं। प्रति वर्ष ये मानक तुरन्त जानकारी देने के लिए प्रकाशित किए जाते हैं।

प्रत्येक मानक परिचालन विधि (एसओपी) के अन्तर्गत समय-सीमा नियत की गई है तथा कार्य करने के लिए उत्तरदायित्व भी निश्चित किया गया है। विभागाध्यक्ष नियमित रूप से इसकी समीक्षा करते हैं तथा एमआर स्तर व आन्तरिक तथा प्रमाणीकरण लेखा परीक्षकों द्वारा मानकों से हटने के प्रमाणों को पहचान कर तुरन्त उपयुक्त उपाय किए जाते हैं।

इसी प्रकार अभी आईएसओ की परिधि में न आने के बावजूद दुर्गापुर इस्पात कारखाने के सभी विभागों जैसे वित्त, सामग्री प्रबन्धन, परियोजना आदि विभागों के लिए आन्तरिक मानक व मानदण्ड तय किए गए हैं।

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सेल द्वारा अथवा अपने नियंत्रण में रखे गए नियम, विनियम, निर्देश, मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं

      1. कार्मिक मेनुअल (इसमें सूचनार्थ/प्रबंधन/कर्मियों के प्रयोग के लिए नियम, विनियम, प्रक्रियाएं लाभ आदि शामिल हैं)। 
      2. कार्मिक गाइड (संगठनात्मक मामलों में कार्यशाला में लाइन मैनेजरों के तुरन्त मार्गदर्शन के लिए हैण्ड पुस्तिका)। 
      3. खरीद एवं ठेका प्रक्रिया-2000 (माल की खरीद के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, ठेके जारी करने तथा इससे सम्बद्ध केन्द्रीय सतर्कता आयोग के मार्गदर्शी सिद्धान्तों सहित)। 
      4. लेखा मेनुअल (इसमें सेल/भिलाई द्वारा कार्य में लाई जा रहे लेखा नियम और प्रक्रियाएं बताई गईं हैं। 
      5. सतर्कता मेनुअल (सतर्कता मामलों पर मार्गदर्शी सिद्धान्त)। 
      6. नियम शाखा द्वारा जारी परिपत्र (इनमें विभिन्न प्रबन्धन कार्यों के लिए नियत नीतियां, प्रक्रियाएं बताई गईं हैं)।
      7. दुर्गापुर इस्पात कारखाने का गुणवत्ता मेनुअल और इसके अन्तर्गत बनाई गई मानक परिचालन प्रविधियां (एसओपी)। 

सेल कार्मिक मेनुअल खण्ड 1 

मानव संसाधन नीति 

      1. भर्ती नीति 
      2. कार्यपालक कार्य निष्पादन समीक्षा प्रणाली
      3. कार्यपालक पदोन्नति नीति व नियम
      4. चिकित्सा कार्यपालकों के लिए पदोन्नति नीति व नियम
      5. गैर कार्यपालकों को कार्यपालक केडर में पदोन्नति एवं पुष्टि के लिए प्रणाली
      6. कार्यपालकों के प्रोबेशन और कन्फरमेशन के लिए नीति
      7. सेल के भीतर समयबद्ध पोस्टिंग की नीति
      8. लिअन और डेप्यूटेशन तथा रिटेंशन
      9. डेप्यूटेशन की मानक शर्तें
      10. अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को अथवा वहां से सेल में स्थानांतरण पर लाभ
      11. विदेशी यात्रा एवं कार्य के सम्बन्ध में नीतिगत मार्गदर्शी सिद्धान्त
      12. कार्यपालकों के लिए समय से पूर्व सेवानिवृत्ति योजना।

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दुर्गापुर इस्पात कारखाने के नियंत्रण में दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य

दुर्गापुर इस्पात कारखाना सेल की एक उत्पादन इकाई है। इसलिए इसके अपने नियंत्रण में अलग से कोई दस्तावे नहीं हैं। परन्तु, सेल के पास दस्तावेज भिलाई पर भी लागू हैं तथा सेल के निदेशक मण्डल और निगमित कार्यालय के निर्देशों व मार्गदर्शन में यह इकाई कार्य करती है। सेल के पास दस्तावेज नीचे बताए जा रहे हैं।

1. समझौता ज्ञापन (एमओयू) 

सेल और इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के बीच 2005-06 के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें कम्पनी को विश्व श्रेणी की कम्पनी बनाने तथा भारतीय इस्पात कारोबार में गुणवत्ता लाभ तथा उपभोक्ता सन्तुष्टि की दृष्टि से सबसे आगे ले जाने की परिकल्पना की गई है। इस परिकल्पना को साकार करने के लिए कम्पनी ने 2012 निगमित योजना, जो विकास का मार्ग दर्शाती है, तैयार की है। योजना दो चरणों के लिए है। प्रथम 2006-07 और फिर 2011-12 के लिए। यह दसवीं और ग्यारहवीं योजना के अनुरूप चलाई जाएगीं।

इस दस्तावेज में योजना के प्रमुख लक्ष्य व उद्देश्य, लक्ष्यों के मूल्यांकन के लिए मानक तथा इस्पात मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले सहायता तथा वायदों का उल्लेख किया गया है। साथ ही, एमओयू पर नजर रखने और उस पर कार्रवाई के लिए भी कार्य योजना बनाई गई है। 

2. मेमोरेन्डम आॅफ एसोसिएशन और आर्टिकल्स आॅफ एसोसिएशन

(24 जनवरी 1973 को कम्पनी अधिनियम, 1956 के अधीन पंजीकृत)

इस दस्तावेज में सेल द्वारा कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुरूप उसके ढांचे, उद्देश्य और परिचालन की व्याख्या की गई है। 

3. वार्षिक प्रतिवेदन

इस प्रतिवेदन में गत वित्तीय वर्ष में कम्पनी के कुल कार्य निष्पादन पर निदेशकों का प्रतिवेदन होता है। इसमें सभी यूनिटों और सहायक कम्पनियों में उत्पादन तथा उनके वित्तीय कार्य निष्पादन का भी ब्यौरा दिया जाता है। प्रतिवेदन में कम्पनी के लेखा परीक्षित, वित्तीय लेखे, व्यय तथा लाभ/हानि वक्तव्य भी शामिल किया जाता है।

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नीति निर्धारण या उन पर कार्यान्वयन के लिए क्या जन साधारण से विचार-विमर्श की कोई व्यवस्था है तो उसका विवरण

नीति निर्धारण तथा उसके कार्यान्वयन के सम्बन्ध में आम जनता से विचार-विमर्श की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है। वाणिज्यिक आधार पर एक कारोबारी संगठन होने के नाते दुर्गापुर इस्पात कारखाने को इस संबंध में जनता से विचार-विमर्श करने की आवश्यकता नहीं है।

परन्तु, जनता से संबंधित उपायों के संबंध में जनता के प्रतिनिधियों, जिनमें विधान सभा सदस्य व लोक सभा सदस्य शामिल हैं, से अनौपचारिक तौर पर बातचीत की जाती है तथा उस जनता की राय पता लगाई जाती है जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं। 

स्थानीय जन सम्पर्क माध्यमों तथा प्रबन्धन के साथ आपसी विचार-विमर्श, विशेष रूप से जन संपर्क विभाग की संचार शाखा के साथ दुर्गापुर नगरी के निवासियों के विचारों पर ध्यान दिया जाता है तथा यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजनाएं बनाते व उन पर अमल करते समय आम राय को सामने रखा जाए।

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दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषदें, समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं

इस प्रकार की संस्थाओं का गठन स्टील अथाॅरिटी आॅफ इण्डिया लिमिटेड के निगमित स्तर पर किया जाता है। ये संस्थाएं हैं: इस्पात के लिए राष्ट्रीय संयुक्त समिति, उत्पादन तथा उत्पादकता पर समिति, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण पर संयुक्त समिति आदि।

दुर्गापुर इस्पात कारखाने में प्रबन्धन और कर्मचारियों के प्रतिनिधि इन समितियों में भाग लेते हैं तथा निर्णय करने की प्रक्रिया से सम्बद्ध रहते हैं। समितियों में लिए गए निर्णय कारखाना स्तर पर लागू किए जाते हैं।

दुर्गापुर इस्पात कारखाने में कर्मचारियों की भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कर्मचारियों के प्रतिनिधियों सहित संयुक्त सौदेबाजी परिषद् काम कर रही है। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों तथा प्रबन्धन के प्रतिनिधियों की परामर्श समितियां भी विभिन्न क्षेत्रों में (नगर, अस्पताल आदि) कार्य कर रही हैं। 

सह उद्योगों के विकास तथा अपने क्षेत्र में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए संगठन के प्रयासों के समर्थन के लिए एक कारखाना स्तरीय समिति नियमित रूप से कार्य कर रही है। इसमें दुर्गापुर इस्पात कारखाने के सदस्य, स्थानीय उद्योगों के प्रतिनिधि और राज्य सरकार को स्थान दिया गया है।

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प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, कम्पनी के नियमों के अन्तर्गत मुआवजे की प्रणाली

कार्यपालक वेतनमान
कार्यपालक श्रेणी वेतनमान
ई-0 8600-250-14600
ई-1 10750-300-16750
ई-2 13700-350-18250
ई-3 16000-400-20800
ई-4 17500-400-22300
ई-5 18500-450-23900
ई-6 19000-450-24400
ई-7 19500-450-25350
ई-8 20500-500-26500
ई-9 23750-600-28550
गैर-कार्यपालक वेतनमान
गैर-कार्यपालक श्रेणी वेतनमान
एस-1 4000-80-5600
एस-2 4000-86-4682-91-5865
एस-3 4170-93-4821-98-6095
एस-4 4300-104-5028-110-6458
एस-5 4500-118-5326-126-6964
एस-6 4800-133-5731-140-7551
एस-7 5100-148-6136-156-8164
एस-8 5400-163-6541-170-8751
एस-9 5800-179-7053-186-9471
एस-10 6400-200-11400
एस-11 7500-230-13250

इसके अतिरिक्त सभी नियमित कर्मचारियों को उत्पादन, गुणवत्ता और कारोबारी कार्य निष्पादन मानदण्डों तथा व्यक्तिगत उपस्थिति से सम्बद्ध मासिक प्रोत्साहन बोनस भी प्राप्त करने का अधिकार है।

अन्य भत्तों में मकान किराया भत्ता, नगर प्रतिपूर्ति भत्ता, कोक क्षतिपूर्ति राशि तथा रात्रि पारी भत्ता शामिल है।

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प्रत्येक एजेन्सी को आबंटित बजट, जिसमें सभी योजनाओं का विवरण, प्रस्तावित व्यय तथा किए गए भुगतान का विवरण हो

विभिन्न व्यय मदों के लिए आबंटित बजट तथा दुर्गापुर इस्पात कारखाने के विभिन्न óोतों से आय का सारांश नीचे दी गई तालिका में दिया गया है –

परिचालन बजट लाख रुपये में
विवरण बजट वास्तविक बजट
2006-07 2006-07 2007-08
क. आय
  कुल बिक्री 399033 428768 497781
  अन्तर कारखाना स्थानांतरण 7426 20039 24587
  आन्तरिक उपभोग 132 403 376
  कुल राजस्व 406591 449210 522744
 
  घटा: व्यय
  उत्पादन शुल्क 51065 53007 66217
  वाह्यगामी भाड़ा 8433 11950 10678
  जेपीसी को अंशदान 35 34 32
  कुल 59533 64991 76928
  शुद्ध राजस्व 347058 384219 445816
 
  भण्डारों में वृद्धि (+)/कमी (-) 1903 11039 253
  अर्जित ब्याज 286 585 227
  अन्य राजस्व 4325 7078 5048
  अवलेखित प्रावधान   163  
  शुद्ध आय 353571 403084 451345
 
ख. व्यय
  कोयले के अलावा कच्चा माल 45017 47388 50694
  कोकिंग कोयला एवं कोक 123320 119487 131388
  कर्मचारी, पारिश्रमिक एवं अनुलाभ 48000 54283 59485
  भण्डार एवं कलपुर्जे 34300 35852 37121
  बिजली एवं ईंधन 23449 22537 25833
  मरम्मत एवं रखरखाव 7000 6313 8288
  मुख्यालय कमी एवं सीसीएसओ 4718 4121 4775
  आरडीसीआईएस व्यय 185   119
  सेट व्यय 421   357
  स्टाॅकयार्ड व्यय 3737 3172 3631
  अन्य व्यय एवं प्रावधान 11537 20007 16683
  पूर्व अवधि के समायोजन   215  
  कुल व्यय 301684 313375 338374
  घटा: अन्तर खाता समायोजन 4584 4204 3000
  शुद्ध व्यय 297100 309171 335374
 
ग. सकल मार्जिन 56471 93913 115970
घ. ब्याज 3871 1547 3083
ङ. मूल्यहा्रस 30600 29990 31900
च. शुद्ध लाभ (+)/हानि(-) (ग-घ-ङ) 22000 62376 80987

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सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रमों से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण

दुर्गापुर इस्पात कारखाने में आसपास के क्षेत्रों के विकास, परिवार कल्याण तथा एड्स नियंत्रण कार्यक्रमों पर व्यय के अतिरिक्त अन्य कोई सहायता कार्यक्रम नहीं चलाए जा रहे हैं।

आसपास के क्षेत्रों का विकास:

दुर्गापुर इस्पात कारखाना आसपास के क्षेत्रों के विकास की अपनी योजना के अन्तर्गत इस्पात नगरी के चारों तरफ के क्षेत्र में विकास में सहयोग देता है। इस पर वर्ष 2004-05 में 51.75 लाख रुपये खर्च किए गए। 

परिवार कल्याण:

छोटे परिवार को प्रोत्साहन तथा माँ-बच्चा की देखभाल: ये मूलतः पिछडे़ वर्ग के लोगों के लिए है। दुर्गापुर इस्पात कारखाने का चिकित्सा विभाग परिवार कल्याण तथा शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम चला रहा है। यह कार्यक्रम दुर्गापुर इस्पात नगरी तथा आसपास के उन क्षेत्रों के लिए है जहाँ अच्छी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। गत 4 वर्षों में परिवार कल्याण पर किया गया खर्च नीचे दिया जा रहा है: 

परिवार कल्याण तथा शिशु स्वास्थ्य पर व्यय
वर्ष वर्ष में वास्तविक व्यय (लाख रु. में) मामलों की संख्या
2001-02 3.50 772
2002-03 3.30 979
2003-04 3.50 1039
2004-05 3.0 957

एड्स नियंत्रण:

दुर्गापुर इ्रस्पात कारखाने की चिकित्सा सेवाएं राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण, भारत सरकार के सहयोग से नियमित एड्स चेतना कार्यक्रम आयोजित करता है। इसके लिए गत 4 वर्षों में व्यय इस प्रकार है:

एड्स नियंत्रण परियोजना पर व्यय
वर्ष राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण से प्राप्त
(लाख रु. में)
राजस्व व्यय
(लाख रु. में)
2001-02 7.0 3.15
2002-03 Nil 1.85
2003-04    
Set Order: 
4
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